1.4 राजनीतिक और सामाजिक पृष्ठभूमि
.1. सामंती व्यवस्था का पतन और नई सामाजिक संरचना का उदय :
• मध्यकाल में यूरोप में सत्ता का केंद्र भूमि - आधारित सामंती व्यवस्था थी , जहाँ राजा , कुलीन और चर्च मिलकर समाज को नियंत्रित करते थे।
• 14 वीं शताब्दी के बाद कृषि उत्पादन में गिरावट , प्लेग (Black Death) महामारी , और जनसंख्या में कमीने सामंतों की शक्ति कमजोर कर दी।
• कृषक वर्ग का विस्थापन हुआ और वे शहरों की ओर प्रवास करने लगे , जिससे शहरीकरण और व्यापारी वर्ग का उदय हुआ।
2. नगर राज्यों (City-States) का विकास और प्रतिस्पर्धा :
• इटली के फ्लोरेंस , वेनिस , मिलान , पिसा , जेनोआ आदि स्वशासित नगर - राज्य बन गए , जिनमें व्यापार , बैंकिंग और कलाओं का केंद्र स्थापित हुआ।
• इन नगर राज्यों के बीच सांस्कृतिक , राजनीतिक और आर्थिक प्रतिस्पर्धा थी , जिसने कलाकारों , वैज्ञानिकों और दार्शनिकों को प्रोत्साहन दिया।
• फ्लोरेंस विशेष रूप से पुनर्जागरण का पालना माना जाता है , जहाँ मेडिची परिवार ने विद्वानों और कलाकारों को संरक्षण दिया।
3. चर्च की सत्ता से असंतोष और वैचारिक स्वतंत्रता की माँग :
• मध्ययुगीन काल में कैथोलिक चर्च न केवल धार्मिक बल्कि राजनीतिक और आर्थिक सत्ता का केंद्र था।
• चर्च द्वारा दुराचार , भ्रांतिपूर्ण सिद्धांत , और धार्मिक कर ( जैसे इंडलजेंस ) से जनता में असंतोष उत्पन्न हुआ।
• विद्वानों ने धार्मिक सत्य पर तर्क , अनुभव और विवेक आधारित सोच को महत्त्व दिया । इस से धार्मिक और बौद्धिक नव जागरण की नींव पड़ी।
• यह असंतोष आगे चल कर धर्म सुधार आंदोलन (Reformation) में परिणत हुआ।
4. व्यापारी और बैंकर वर्ग का सशक्तिकरण :
• नगरों में उभरते बैंकर्स , व्यापारियों , दस्तकारों की आर्थिक शक्ति बढ़ने लगी।
• उन्होंने कला , शिक्षा , स्थापत्य , और मुद्रण कार्यों में निवेश किया , जिससे पुनर्जागरण की वैचारिक ऊर्जा को समर्थन मिला।
• " पैसा अब धर्म और वंश से अधिक महत्त्वपूर्ण बन गया। "
5. सामाजिक गति शीलता और शिक्षा का प्रसार :
• विश्व विद्यालयों और स्कूलों की स्थापना से साक्षरता दर में वृद्धि हुई।
• मध्यकालीन धार्मिक शिक्षा के स्थान पर गणित , विज्ञान , व्याकरण , कविता आदि पर बल दिया जाने लगा (known as studia humanitatis ) ।
• व्यक्तिवाद और स्वतंत्र चिंतन की धारणा समाज में स्थानपा ने लगी।