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1.6 मूल विचारधारात्मक संक्रमण मध्यकाल से आधुनिकता की ओर बौद्धिक क्रांति

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1.  मध्यकालीन मानसिकता (Medieval Mindset):  

 •  ईश्वर - केन्द्रित जीवन - दृष्टि : जीवन का उद्देश्य ईश्वर की सेवा ,  मोक्ष प्राप्ति और पाप से मुक्ति माना जाता था।  
 •  धार्मिक अधिनायकवाद : कैथोलिक चर्च ही ज्ञान ,  शिक्षा और नीति निर्धारण का सर्वोच्च केंद्र था।  
 •  रहस्यवाद (Mysticism) : विश्वास और रहस्य आधारित दृष्टिकोण को प्राथमिकता –  तर्क की अपेक्षा श्रद्धा पर बल।  
 •  धर्म प्रधान समाज : शिक्षा ,  चिकित्सा ,  साहित्य और कलास भी ईश्वरीय उद्देश्य की पूर्ति के लिए प्रयुक्त होते थे।  
 •  गृहस्थ जीवन की अवहेलना : सांसारिक सुखों को तुच्छ और पापमय माना जाता था।

2.  पुनर्जागरणीय दृष्टिकोण (Renaissance Thinking):  

 •  मानव - केंद्रित (Human-Centric)  दृष्टि : मनुष्य को ब्रह्मांड का केंद्र माना गया ;  उसकी विवेक शीलता ,  अनुभव और जिज्ञासा को महत्त्व मिला।  
 •  तर्क शीलता और विश्लेषण : ज्ञान के लिए अनुभव ,  परीक्षण और तर्क को प्राथमिकता – "Cogito ergo sum" ( मैं सोचता हूँ ,  इसलिए मैं हूँ ) –  डेसकार्टेस।  
 •  धर्म निरपेक्षता (Secularism) : जीवन को धार्मिक आधिपत्य से बाहर देखना ;  कला ,  विज्ञान ,  राजनीति का स्वतंत्र विकास।  
 •  व्यक्तिवाद (Individualism) : व्यक्ति की सोच ,  रचनात्मकता ,  और अधिकारों की स्वीकृति।  
 •  प्राकृतिक जीवन की स्वीकृति : सौंदर्य ,  प्रेम ,  संगीत ,  शारीरिक सौंदर्य और प्रकृति के प्रति उत्साहपूर्ण दृष्टिकोण।  
 •  ज्ञान की पुनर्परिभाषा : ज्ञान अब केवल धर्म ग्रंथों से नहीं ,  बल्कि प्रकृति ,  अनुभव ,  और प्राचीन ग्रीक - रोमन ग्रंथों से भी प्राप्त किया जा सकता है।  
 

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